Happy Chhath Puja 2020 | Chhath Puja History | Chhathi Maiya | Chhath Puja Kyu Manaya Jata Hai | Information About Chhath Puja In Hindi
छठी मैया कौन है | छठ पूजा | छठ पूजा क्यों मनाया जाता है | छठ पूजा क्यों करते हैं |
छठ पूजा पर्व नहीं बल्कि 4 दिनों तक चलने वाला महापर्व है | छठ पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाता है । छठ महापर्व का आरम्भ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को तथा समाप्ति कार्तिक शुक्ल सप्तमी को होती है | सूर्य उपासना का यह अनुपम आलौकिक महापर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है।क्या आपको पता है यही एक मात्र भारत का ऐसा पर्व है जो वैदिक काल से चला आ रहा है और आज भी बहुत धूम धाम और श्रद्धा से मनाया जाता है
छठ पूजा में भूलकर भी न करें यह गलती, जानने के लिये यहाँ दबायें Click Here
सूर्य देव और छठी मईया का संबंध भाई-बहन का है। इसलिए छठ पूजा के मौके पर सूर्य की आराधना फलदायी मानी गई।
छठ पूजा की शुरुआत कैसे हुयी इसकी लिए अलग-अलग पौराणिक कथाएं प्रचलित है|
1.पुराणों में संदर्भित छठ मैय्या पूजा की कहानी :-
पुराणों के अनुसार एक प्रियवर नामक राजा था जिसकी कोई भी संतान नहीं थी तथा बहुत जतन करने के बाद भी उसको संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ। तब महर्षि कश्यप ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रयेष्टि यज्ञ करने की सलाह दी। महर्षि के परामर्श अनुसार राजा ने यज्ञ करवाया व रानी ने यज्ञ के बाद एक पुत्र को जन्म दिया परन्तु वह मरा हुआ पैदा हुआ।कहा जाता है जब राजा प्रियवर मृत बच्चे को दफनाने की तैयारी कर रहे थे तभी आसमान से एक ज्योर्तिमय विमान धरती पर उतरा जिसमे एक आलोकिक देवी विराजमान थी और देवी ने बोलै, " मै षष्ठी देवी हूँ और संसार के समस्त बालकों की रक्षिका हूँ।'' इतना कहकर देवी ने मृत बच्चे को स्पर्श किया, और वह जीवित हो उठा। इसके बाद से ही राजा ने अपने समस्त राज्य में यह त्योहार धूम धाम मनाने की घोषणा कर दी |
जानिए क्या है स्त्रियों के सोलह श्रृंगार पढ़िए पूरा article
2.महाभारत काल में सूर्य पुत्र कर्ण द्धारा सूर्य पूजा का वर्णन :-
कुछ मान्यताओं के अनुसार छठ पूजा की शुरुवात महाभारत काल से हुयी थी। इस पर्व की शुरुवात सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य भगवान की पूजा करके किया था। सूर्यपुत्र कर्ण भगवान सूर्य के परमं भक्त थे और वो रोजाना घंटों तक पानी में खड़े रहकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देते थे। यही से आज भी छठ पूजा में अर्घ्य दान की परम्परा प्रचलित है।3.द्रौपदी द्धारा महाभारत काल में छठ पूजा का वर्णन :-
छठ पूजा के बारे में एक कथा और भी प्रचलित है कहा जाता है जब पांडव अपना सारा राजपाठ जुए में हार गए थे तब उनकी पत्नी द्रौपदी ने छठ मैया का व्रत रखा था। इस व्रत से छठी मैया ने उनकी सारी मनोकामनाएँ पूर्ण कर दी व पांडव को अपना सम्पूर्ण राजपाठ पून: प्राप्त हो गया।4.त्रेता युग में माता सीता द्धारा छठ पूजा :-
एक मान्यता के अनुसार जब भगवान राम व माता सीता 14 साल के वनवास के बाद आयोध्या लौटे तो ऋषि मुनियों ने रावण वध के पाप से मुक्ति के लिए भगवान राम व माता सीता को राजसूर्य यज्ञ करने का परामर्श दिया। पूजा के लिया उन्होंने मुग्दल ऋषि को सादर आमंत्रित किया। मुग्दल ऋषि ने माता सीता को शुक्ल पक्ष की षष्ठी को सूर्यदेव की उपासना करने का आदेश दिया। माता सीता ने मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर ६ दिनों तक भगवान सूर्य की पूजा की व सप्तमी में सूर्योदय के समय फिर से अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया।छठ पूजा के प्रत्येक दिन का वर्णन:-
छठ पूजा का पर्व चार दिवसीय होता है जिसका आगाज चतुर्थी तिथि से नहाय खाय से होता है व समापन सप्तमी तिथि के संध्या अर्घ्य के बाद होता है।नहाय खाय (पहला दिन):-
छठ पर्व की सर्वप्रथम शुरआत चैत्र या कार्तिक माह के चतुर्थी से होती है जिसे नहाय खाय कहते है जोकि इस वर्ष 18 नवम्बर को है।
सबसे पहले घर की साफ़ सफाई कर, घर को पवित्र किया जाता है इसके बाद जो भी घर में छठ पूजा का संकल्प लेता है वह स्नान कर, बालों को अच्छी तरह साफ़ कर नए वस्त्र धारण करता है।
व्रती इस दिन केवल एक बार ही भोजन ग्रहण कर सकते हैं जिसमे कद्दू, चना दाल और चावल का उपयोग कर सकते है। रोटी, पराठा, पूरियां और सब्जी आदि पूर्णता वर्जित है।
भोजन बनने के बाद सर्वप्रथम व्रती को ही भोजन ग्रहण करना चाहिए उसके उपरांत ही परिवार के अन्य सदस्य भोजन ग्रहण करें।
खरना और लोहंडा (दूसरा दिन ,19 नवम्बर) :-
छठ पर्व का दूसरा दिन चैत्र या कार्तिक माह के पंचमी को मनाया जाता है।
इस दिन व्रती पुरे दिन का उपवास रखती है व सूर्यास्त के पहले वह अन्न तो दूर की बात है जल की एक बून्द भी ग्रहण नहीं कर सकती है।
छठ व्रती शाम को भोजन ग्रहण करती है जिसे खरना कहते है। खरना का प्रसाद चावल को गन्ने के रस में पकाकर या दूध में चावल को पकाकर गुड़ डालकर नए मिट्ठी के चूल्हे पर बनाया जाता है।
शाम को व्रती इस प्रसाद को एकांत में ग्रहण करती है। कहते है इस प्रसाद को ग्रहण करते समय व्रती के द्वारा किसी तरह की आवाज़ सुनना पर्व के नियमों के विरुद्ध माना जाताहै।
इसके बाद से छठ व्रती का 36 घंटों का निर्जला उपवास आरम्भ होता है।
संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन 20 नवम्बर):-
छठ का यह पर्व ,चैत्र या कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है।
पूरे दिन सभी लोग मिलकर शाम की पूजा की तैयारियाँ करते है है व इस पूजा के लिए एक विशेष प्रसाद बनता है जिसे ठेकुआ कहते है चावल का लड्डू।
शाम पूजन के लिए बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाए। सूप में नारियल 5 तरह के फल, फूल व पूजा के अन्य समान रखें।
इस बांस की टोकरी को घर के पुरुष अपने सर की ऊपर की तरफ रखते है जिससे यह अपवित्र न हो व महिला छठ के गीत गाते हुयी छठ घाट (तालाब, नदी, नहर) की और जाती है।
ढलते सूरज को व्रती पानी में खड़े होकर अर्घ्य देती है है व पूजन के बाद अगली पूजा की तैयारी शुरू हो जाती है।
उषा अर्घ्य (चौथा दिन, २१ नवम्बर):-
उषा अर्घ्य के लिए व्रती उसी छठ घाट पर जाती है जहां तीसरे दिन गयी थी। सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी सारी मनोकामना पूरी करने के लिए प्रार्थना करती है। विधिवत पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है व इस तरह छठपूजा सम्पन्न होती है।छठ पूजा में लगने वाली सामग्री:-
- अपने लिए नए वस्त्र
- छठ पूजा प्रसाद के लिए २-३ बांस की टोकरी
- सूप
- पानी वाला नारियल
- गन्ने जिसमे पत्ते लगे हो
- गिलास,थाली और लोटा
- चावल
- सिन्दूर और कुमकुम
- अगरबत्ती, धुप, चन्दन, कपूर, माचिस
- गेहूं, गुड़ और चावल का आटा
- मिठाई व शहद
- पान व सुपारी
- सुधनी
- मीठा नीबूं
- नाशपाती, केला, सेब, सिंघाड़ा, शकरकंद, शरीफा
- अदरक का पौधा, हल्दी का पौधा
- मूली
- दूध और जल
- आम के पत्ते
- कैराव
छठ पर्व की पूजा विधि :-
1. नहाय खाए से छठ पूजा का आगाज होता है याद रखें इस दिन केवल एक बार ही भोजन ग्रहण करें। भोजन में आप कद्दू, लौकी,चना दाल व चावल ग्रहण कर सकती है। अगर भोजन कांसे या मिटटी के बर्तन में चूल्हे पर आम की लकड़ी लगा कर पकाया गया हो तो यह बहुत ही उत्तम रहेगा।2. पंचमी को साँझ के समय गुड़ या चावल की खीर व पूरी बनाकर छठी माता को पहले भोग लगाए इसके बाद सर्वप्रथम एकांत में बैठकर व्रती इस प्रसाद को ग्रहण करें बाद में घर के अन्य सदस्य व ब्रह्मणा को प्रसाद दें।
3. चैत्र या कार्तिक माह की षष्ठी को व्रती जल्दी उठ कर अपने नित्य कार्य व स्नान कर व्रत का संकल्प लेकर इस मन्त्र का उच्चारण करें:-
ॐ अद्य अमुक गोत्रो अमुक नामाहं मम सर्व
पापनक्षयपूर्वक शरीरारोग्यार्थ श्री
सूर्यनारायणदेवप्रसन्नार्थ श्री सूर्यषष्ठीव्रत करिष्ये।
4. पूरे दिन निराहार व निर्जला उपवास रखे।
5. छठ पूजा के लिए बांस की बनी हुयी टोकरी को पहले अच्छे से कुमकुम, चन्दन, हल्दी और केसर आदि का घोल बना कर सजा ले फिर उसमे पूजा का प्रसाद, फल, अदरक हल्दी का पौधा, पानी वाला नारियल आदि पूजा सामग्री विधिवत रखें। सूप को भी अच्छी तरह सजा के डालिये में रखे (भगवान सूर्य और माता छठ को सूप से ही अर्घ्य दिया जाता है) बांस की डालिया को किसी साफ़ पीले या लाल कपडे से ढक लें।
6. शाम के समय सूर्य अस्त से पूर्व ही घर के पुरुष सदस्य टोकरी को अपने हाथ से उठाकर सर पर रखकर छठ घात तक ले जाते है। और घर की महिलाएँ छठ गीत गाते हुए साथ में जाती है
7. छठ घाट पर पहुंचकर घर के सदस्य चार गन्नो से मंडप बनाते है वही व्रती गाय के घी का दीपक जलाकर विधिवत पूजा आरम्भ करती है
8. नदी या तालाब में घुटने तक जाकर सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया जाता है। अर्ध्य देने के लिए सूप पर सम्पूर्ण पूजा प्रसाद रखकर उस पर दीप जलाए व दोनों हाथों से सूप को लेकर निम्न मन्त्र का उच्चारण करें व सूर्य को ३ बार अर्घ्य दे :-
ॐ एहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पया मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर:॥
9. अर्ध्य के समय सूर्य भगवान को दूध व जल चढ़ाए व सूप में रखे प्रसाद को छठी मैया व भगवान सूर्य को अर्पण करें।
10. अर्घ्य अर्पण के बाद 7 परिक्रमा घूम के कीजिये व निम्न मन्त्र का जाप कीजिये।
ॐ सूर्य देवाय नम :।।
11. पूजा आराधना के बाद प्रसाद को फिर से डलिया में रखकर घर ले आए।
12. रात्रि में छठी मैया के भजन व गीत गाए व कथा सुनें। साथ ही अगले दिन सप्तमी को सूर्योदय से पहले उठकर षष्ठी की डालिए को लेकर फिर से उसी घाट पर अपने पुरजन-परिजनके साथ जाएं।
13. ऊषा अर्घ्य के सभी नियम-विधान संध्या अर्घ्य की तरह ही होते हैं। सूर्य को अर्घ्य व पूजन व्रती व सभी घर के सदस्य घर आते है व प्रसाद का वितरण सबसे पहले ब्राह्मण व कन्या को देकर करें। इसका बाद सभी परिवार के सदस्य व आस पड़ोस में प्रसाद बटंवा दे, तत्पश्चात प्रसाद ग्रहण कर के अपने व्रत का पारण करें।
देखिये मेहंदी की सरल और सुन्दर डिज़ाइन
छठ पूजा शुभ मुहूर्त
कृपया अपने सुझावों को लिखिए | हम आपके मार्गदर्शन के अभिलाषी है |



Thank you Sir!
जवाब देंहटाएंkeep visiting us for more articles :)